28 मार्च 2020 - 13:39
आयत क्या कहती हैं? वे दुश्मन के मुक़ाबले में नहीं बल्कि ईश्वर के सामने नतमस्तक रहते हैं।

ईश्वर व उसके पैग़म्बर पर वास्तविक ईमान रखने वालों ने जब शत्रु की सेना को देखा तो कहा कि ईश्वर ने इससे पहले ही क़ुरआने मजीद की आयतों में इस बात की सूचना दे दी थी कि पिछली जातियों की तरह तुम्हें कठिन घटनाओं और शत्रु के हमलों का सामना करना पड़ेगा।

सूरए अहज़ाब की आयत क्रमांक 22  का अनुवादः

और जब ईमान वालों ने (शत्रु के सैन्य) दलों को देखा तो कहाः यह तो वही चीज़ है, जिसका ईश्वर और उसके पैग़म्बर ने हमसे वादा किया था। और ईश्वर और उसके पैग़म्बर ने सच कहा था। और इस चीज़ ने उनके ईमान और आज्ञापालन ही को बढ़ाया।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

ईमान वाला व्यक्ति जानता है कि अत्याचारी शत्रु उसे छोड़ने वाला नहीं है अतः वह हमेशा, दुश्मन से मुक़ाबले के लिए तैयार रहता है।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. ईमान वाला व्यक्ति जानता है कि अत्याचारी शत्रु उसे छोड़ने वाला नहीं है अतः वह हमेशा, दुश्मन से मुक़ाबले के लिए तैयार रहता है।
  2. अपने सभी मतभेदों के बावजूद काफ़िर, इस्लाम और मुसलमानों को तबाह करने के लिए एकजुट हो जाते हैं और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपनी सभी संभावनाओं का प्रयोग करते हैं।
  3. ईमान वाले अगर कम भी हों तब भी दुश्मनों के मुक़ाबले में डट जाते हैं चाहे उनकी संख्या बहुत अधिक ही क्यों न हो।
  4. वे दुश्मन के मुक़ाबले में नहीं बल्कि ईश्वर के सामने नतमस्तक रहते हैं।